sábado, 21 de febrero de 2015

Fragmento Himno Védico.



¡Oh, Agni! ¡Fuego Sagrado!¡Fuego Purificador! 
Tú que duermes en el leño y subes en llamas brillantes sobre el altar, 
tú eres el corazón del sacrificio, el vuelo osado  de la plegaria, 
la chispa escondida en todas las cosas y el alma gloriosa del sol.  

Himno Védico.

2 comentarios:

  1. But there is problem of awareness ? Awareness for him self only note for others because परमात्मा नि रा कार एवम एव री वेर, एव री थिंग है और ओल body's मन बुद्धि इन्द्रियों का आधार सुत्रधार है तो हम सब अपने ही आत्मा का कल्याण करने वाले बने यही प्रभु रुपी सांस से प्रार्थना हरेक जीवन सत्त चित्त आनंद से भर जायेगा प्राणों कि प्राण मे आहुति देके हरेक मनुष्य आत्मज्ञानसे लाभाविन्त हो जायेगा ।

    ResponderEliminar
  2. But there is problem of awareness ? Awareness for him self only note for others because परमात्मा नि रा कार एवम एव री वेर, एव री थिंग है और ओल body's मन बुद्धि इन्द्रियों का आधार सुत्रधार है तो हम सब अपने ही आत्मा का कल्याण करने वाले बने यही प्रभु रुपी सांस से प्रार्थना हरेक जीवन सत्त चित्त आनंद से भर जायेगा प्राणों कि प्राण मे आहुति देके हरेक मनुष्य आत्मज्ञानसे लाभाविन्त हो जायेगा ।

    ResponderEliminar